Thursday, 14 July 2016

खाने में क्या बनाऊं?

पत्नी: खाने में क्या बनाऊं?

पति: कुछ भी बना लो, क्या बनाओगी?

पत्नी: जो आप कहो?

पति: दाल चावल बना लो।

पत्नी: सुबह ही तो खाये थे। 

पति: तो रोटी सब्जी बना लो।

पत्नी: बच्चे नहीं खायेंगे।

पति: तो छोले पूरी बना लो।

पत्नी: मुझे तली हुई चीज़ें भारी लगती हैं।

पति: अंडे की भुर्जी बना लो।

पत्नी: आज वीरवार है।

पति: परांठे?

पत्नी: रात को परांठे नहीं खाने चाहिए।

पति: होटल से मंगवा लेते हैं।

पत्नी: रोज-रोज बाहर का नहीं खाना चाहिए।

पति: कढ़ी चावल?

पत्नी: दही नहीं है।

पति: इडली सांभर?

पत्नी: समय लगेगा, पहले बोलना था।

पति: एक काम करो मैग्गी बना लो।

पत्नी: पेट नहीं भरता मैग्गी से।

पति: तो फिर क्या बनाओगी?

पत्नी: जो आप बोलो।

मंगल पर पानी!

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने घोषणा की कि उन्होंने मंगल ग्रह पर पानी खोज निकाला है। अब इस घटना पर हमारे देश की राजनीति में कैसी प्रतिक्रियाएं हुई, जरा देखिये: 

नरेन्द्र मोदी:
मितरों... 60 साल हो गए देश आज़ाद हुए, आज तक पानी मिला क्या?

जनता: नहीं मिला

तो अब मंगल ग्रह पर पानी मिलने के बाद मैं आप सबसे पूछना चाहता हूँ कि...

आपको बुध पर पानी चाहिए कि नही चाहिए?

जनता: चाहिए

आपको शुक्र पर पानी चाहिए कि नहीं चाहिए?

जनता: चाहिए

आपको शनि पर पानी चाहिए कि नहीं चाहिए?

जनता: चाहिए

तो आपसे मेरी हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि इस बिहार चुनाव में मुझे अपना आशीर्वाद दीजिये और भाजपा की सरकार बनवाइए।

राहुल गांधी:
पानी - पानी क्या होता है? आज मैं आपको बताता हूँ कि पानी क्या होता है? पानी, दरअसल पानी होता है। ये जो मंगल ग्रह का पानी है, वो किसानों और मजदूरों का पानी है, गरीबों का पानी है, और ये सूटबूट की सरकार - ये मोदी सरकार उस पानी को उद्योगपतियों को देना चाहती है लेकिन मैं आपको ये बताने आया हूँ कि हम ऐसा होने नहीं देंगे।

अरविन्द केजरीवाल:
मंगल पर पानी ढूँढने के लिए मैं वैज्ञानिकों को बधाई देता हूँ लेकिन ये केंद्र की सरकार पानी का कंट्रोल अपने हाथों में रखना चाहती है, दिल्ली की चुनी हुई सरकार को पानी से दूर रखना चाहती है।

ओवैसी:
कोई ये न समझे कि मंगल के पानी पर सिर्फ किसी एक कौम का हक है। ध्यान रहे कि उस पानी पर मुसलमानों का भी बराबर का हक है।

लालू यादव:
ई मंगल पे पानी, मंगल पे पानी, मंगल पे पानी का करता है रे? धुत! अरे ऊ तो बिहार का पानी है जो हमरे गया से जाता है। गया में जा के पुरखों को पानी देते हो कि नहीं? बोलिए? उहै पानी पहुँचता है मंगल पे बुडबक!

जी न्यूज़:
यहाँ आपके लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि मोदी जी इस देश के ऐसे पहले प्रधानमन्त्री बन गए हैं जिनके कार्यकाल में मंगल पर पानी मिला है।

दीपक चौरसिया:
इस वक़्त मैं मंगल पर हूँ और जैसा कि यहाँ मैं देख पा रहा हूँ ये दरअसल एक स्विमिंग पूल है, जो ललित मोदी का है, जो अपनी पत्नी के इलाज के लिए पेरिस हिल्टन के साथ यहाँ आये हुए हैं।

मोदी भक्त:
देख लो, इसे कहते हैं अच्छे दिन। तुम लोग साले दाल की मंहगाई का रोना ही रोते रहना, बस।

पहले इस्तेमाल करें फिर विश्वास करे!

समाचार पत्र में विज्ञापन आया, हमारे पास एक ऐसा उत्पाद हैं, जिसको पहनकर आप पूरी दुनिया को देख सकते हैं, मगर आपको कोई नही देख सकता।

दस हज़ार में यह सुविधा आपके घर तक फ्री में पहुंचाई जायेगी।

एक लड़की ने विज्ञापन पढ़ते ही 10,000 रुपये भेज दिए।

कुछ दिनों बाद एक पैकेट लेकर आया, लड़की ने उसे जल्दी से खोला तो अन्दर से एक 'बुर्क़ा' निकला वो भी टोपी वाला।

बनिया और कटोरा!

एक बनिए की बाजार में छोटी सी मगर बहुत पुरानी कपड़े सीने की दुकान थी। उनकी इकलौती सिलाई मशीन के बगल में एक बिल्ली बैठी एक पुराने गंदे कटोरे में दूध पी रही थी। एक बहुत बड़ा कला पारखी बनिए की दुकान के सामने से गुजरा। कला पारखी होने के कारण जान गया कि कटोरा एक एंटीक आइटम है और कला के बाजार में बढ़िया कीमत में बिकेगा। लेकिन वह ये नहीं चाहता था कि बनिए को इस बात का पता लगे कि उनके पास मौजूद वह गंदा सा पुराना कटोरा इतना कीमती है।

उसने दिमाग लगाया और बनिए से बोला, 'लाला जी, नमस्ते, आप की बिल्ली बहुत प्यारी है, मुझे पसंद आ गई है। क्या आप बिल्ली मुझे देंगे? चाहे तो कीमत ले लीजिए।'

बनिए ने पहले तो इनकार किया मगर जब कलापारखी कीमत बढ़ाते-बढ़ाते दस हजार रुपयों तक पहुंच गया तो लाला जी बिल्ली बेचने को राजी हो गए और दाम चुकाकर कला पारखी बिल्ली लेकर जाने लगा।

अचानक वह रुका और पलटकर बनिए से बोला--- "लाला जी बिल्ली तो आपने बेच दी। अब इस पुराने कटोरे का आप क्या करोगे? इसे भी मुझे ही दे दीजिए। बिल्ली को दूध पिलाने के काम आएगा। चाहे तो इसके भी 100-50 रुपए ले लीजिए।' 

कहानी में ट्विस्ट

बनिए ने जवाब दिया, "नहीं साहब, कटोरा तो मैं किसी कीमत पर नहीं बेचूंगा, क्योंकि इसी कटोरे की वजह से आज तक मैं 50 बिल्लियां बेच चुका हूं।'

..बनिया आखिर बनिया होता है...इनको कोई बेवकूफ नहीँ बना सकता...

DRINK की खोज!

DRINK शब्द का एक-एक Alphabet एक-एक पेग के असर को देख कर बनाया गया है। अक्षर के पहले शब्द को लेकर DRINK शब्द बना है।

1. यदि एक पेग लेते हैं तो वो Digestion (पाचन) के लिए ठीक है, इसलिये उसका "D" लिया गया।

2. यदि दूसरा पेग लेते हैं तो वो Relaxation (विश्राम) के लिए ठीक है, इसलिये उसका "R" लिया गया।

3. यदि तीसरा पेग लेते हैं तो वो आपको Intelligent ( बुद्धिमान ) बना देता है, इसलिये उसका "I" लिया गया। 

4. यदि चौथा पेग लेते हैं तो वो आपको बातों से Naughty बना देता है, इसलिये उसका "N" लिया गया।

5. यदि पांचवा पेग लेते हैं तो वो आपको King (राजा ) बना देता है, इसलिये उसका "K" लिया गया है।

इस तरह बना है DRINK इसलिये किसी और लिक्विड को पीने को Drink नहीं कहा जाता।